Love Shayari, रोज साहिल से समंदर का नजारा न करो,



रोज साहिल से समंदर का नजारा न करो,
अपनी सूरत को शबो-रोज निहारा न करो,
आओ देखो मेरी नजरों में उतर कर खुद को,
आइना हूँ मैं तेरा मुझसे किनारा न करो।
Love Shayari, रोज साहिल से समंदर का नजारा न करो, Love Shayari, रोज साहिल से समंदर का नजारा न करो, Reviewed by Shayari143 Com on February 26, 2018 Rating: 5

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